रांधण छठ मुख्य रूप से गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक व्रत है, जो श्रावण मास की छठी तिथि को रखा जाता है। यह विशेष रूप से महिलाओं द्वारा पवित्रता, संयम और परिवार की सुख-शांति के लिए किया जाता है।
🌼 रांधण छठ का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व:
- 🧘♀️ पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक:
इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान करके पूरे घर की सफाई करती हैं और बहुत शुद्धता और श्रद्धा से भोजन पकाती हैं।
इस भोजन को पूरी तरह ढककर रखा जाता है, ताकि उसमें कोई अशुद्धि न आए।
- 🌙 अगले दिन व्रत और ठंडा भोजन:
रांधण छठ के अगले दिन यानी सातम को महिलाएं उपवास करती हैं और वही भोजन खाती हैं जो एक दिन पहले बनाया गया होता है।
यह माना जाता है कि शीतला माता को ठंडा भोजन चढ़ाना शुभ होता है।
- 🙏 परिवार की सुख-शांति और आरोग्य के लिए:
महिलाएं यह व्रत अपने पति, संतान और पूरे परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और लंबी उम्र के लिए करती हैं।
यह त्याग, श्रद्धा और मातृत्व प्रेम का प्रतीक होता है।
- 🏡 घर-परिवार की परंपरा और अनुशासन का पालन:
इस व्रत में घर की परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।
कोई नया खाना नहीं बनता, कोई शोर-शराबा या अपवित्रता नहीं होती, और पूरे दिन संयम बरता जाता है।
- 🕊️ शीतला माता से रक्षा की कामना:
यह मान्यता है कि ठंडा भोजन शीतला माता को प्रिय है।
इसलिए इस व्रत से बुखार, चेचक और अन्य रोगों से बचाव की कामना की जाती है।
📜 निष्कर्ष:
रांधण छठ केवल एक उपवास नहीं, बल्कि पवित्रता, अनुशासन, परिवार-प्रेम और धार्मिक श्रद्धा का त्योहार है।
यह हमें सिखाता है कि शुद्धता, संयम और परंपरा के पालन से जीवन में सुख और शांति प्राप्त होती है।
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